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श्री शिव पंचाक्षर मंत्र अनुष्ठान

 हे द्विजो! अब मैं जपयोगका वर्णन करता हूँ, आप सब लोग ध्यान देकर सुनें। तपस्या करनेवालेके लिये जपका उपदेश किया गया है; क्योंकि वह जप करते-करते अपने आपको सर्वथा शुद्ध (निष्पाप) कर लेता है। हे ब्राह्मणो! पहले ‘नमः’ पद हो, उसके बाद चतुर्थी विभक्तिमें ‘शिव’ शब्द हो, तो पंचतत्त्वात्मक ‘नमः शिवाय’ मन्त्र होता है। इसे ‘शिव-पंचाक्षर’ कहते हैं। यह स्थूल प्रणवरूप है। इस पंचाक्षरके जपसे ही मनुष्य सम्पूर्ण सिद्धियोंको प्राप्त कर लेता है। पंचाक्षरमन्त्रके आदिमें ओंकार लगाकर ही सदा उसका जप करना चाहिये। हे द्विजो! गुरुके मुखसे पंचाक्षरमन्त्रका उपदेश पाकर जहाँ सुखपूर्वक निवास किया जा सके, ऐसी उत्तम भूमिपर महीनेके पूर्वपक्ष (शुक्ल)-में प्रतिपदासे आरम्भ करके कृष्णपक्षकी चतुर्दशीतक निरन्तर जप करता रहे। माघ और भादोंके महीने अपना विशिष्ट महत्त्व रखते हैं। यह समय सब समयोंसे उत्तमोत्तम माना गया है ⁠।⁠।⁠ ३२—३५ ⁠।⁠। साधकको चाहिये कि वह प्रतिदिन एक बार परिमित भोजन करे, मौन रहे, इन्द्रियोंको वशमें रखे, अपने स्वामी एवं माता-पिताकी नित्य सेवा करे। इस नियमसे रहकर जप करनेवाला पुरुष एक हजार जपसे ही शुद्ध हो जाता है, अन्यथा वह ऋणी होता है। भगवान् शिवका निरन्तर चिन्तन करते हुए पंचाक्षर-मन्त्रका पाँच लाख जप करे। [जपकालमें इस प्रकार ध्यान करे] कल्याणदाता भगवान् शिव कमलके आसनपर विराजमान हैं, उनका मस्तक श्रीगंगाजी तथा चन्द्रमाकी कलासे सुशोभित है, उनकी बायीं जाँघपर आदिशक्ति भगवती उमा बैठी हैं, वहाँ खड़े हुए बड़े-बड़े गण भगवान् शिवकी शोभा बढ़ा रहे हैं, महादेवजी अपने चार हाथोंमें मृगमुद्रा, टंक तथा वर एवं अभयकी मुद्राएँ धारण किये हुए हैं। इस प्रकार सदा सबपर अनुग्रह करनेवाले भगवान् सदाशिवका बार-बार स्मरण करते हुए हृदय अथवा सूर्यमण्डलमें पहले उनकी मानसिक पूजा करके फिर पूर्वाभिमुख हो पूर्वोक्त पंचाक्षरी विद्याका जप करे। उन दिनों साधक सदा शुद्ध कर्म ही करे। जपकी समाप्तिके दिन कृष्णपक्षकी चतुर्दशीको प्रातःकाल नित्यकर्म सम्पन्न करके शुद्ध एवं सुन्दर स्थानमें [शौच-संतोषादि] नियमोंसे युक्त होकर शुद्ध हृदयसे पंचाक्षर-मन्त्रका बारह हजार जप करे ⁠।⁠।⁠ ३६—४२ ⁠।⁠।

- श्री शिव पुराण , विद्येश्वर संहिता।

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*आकस्मिक संकट, शत्रुबाधा , रोगमुक्ति, प्रेतबाधा, आर्थिक संकट आदि निवारण हेतु प्रार्थना के रूप में #स्वामी #रूपेश्वरानन्द जी के मार्गदर्शन में दिनांक : **24-नवम्बर-2020 ( मंगलवार/कंस वध तिथी) से 30-नवम्बर -2020( कार्तिक पूर्णिमा)** तक*
*🚩 " श्री बजरंग बाण सम्पुटित श्री संकटमोचन अष्टक पाठ"🚩*
*का साप्ताहिक पाठ आयोजन किया जा रहा है।*
*सहभागी पाठक को प्रतिदिन प्रातःकाल 5 am से / अथवा रात्रिकाल 9 pm से पाठ आरंभ करना है।*
*🌻श्री बजरंग बाण 11 पाठ , उसके बाद 108 बार श्री संकटमोचन अष्टक का पाठ और फिर पुनः श्री बजरंग बाण का 11 पाठ"🌻*
*करना है।*
*इस साप्ताहिक पाठ आयोजन में भागीदार बनने हेतु आप सभी श्रध्दालुओं का आवाहन किया जाता है।*

*🚩पाठ से सम्बन्धित महत्वपूर्ण सूचना : 🚩*

*1- यदि पाठ के पूर्व संभव हो तो एक पाठ श्री राम रक्षा स्तोत्र का भी पढें।*
*2- पाठ के पूर्व संकल्प करना है। संकल्प स्वामी रूपेश्वरानन्द आश्रम की वेबसाइट https://swamirupeshwaranand.in/ से डाउनलोड कर सकते है। श्री बजरंग बाण और श्री संकटमोचन अष्टक भी इसी वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते है।*
*3- पाठ की संख्या उपासक अपनी इच्छा से बढ़ा सकता है। परन्तु पाठ की संख्या प्रतिदिन एक जैसी रखनी है।*
*4- नौकरी करनेवालों के लिये स्थान और समय की प्रतिबद्धता नही है।*
*5- पाठ काल में आहार-विहार के नियम पालन करें। सात्विक आहार करें।*
*6- पाठ सामुहिक रूप से, घर अथवा मंदिर में कर सकते है।*
*7- पाठ के अंतिम दिन बच्चों को, वानरों को अन्नदान ( भण्डारा ) कर सकते है। यह अनिवार्य नही है।*
*8- यह पाठ नित्य 7 दिन तक करना है।*

*अन्य कोई प्रश्न हो तो +91-7607233230 पर वाट्सएप संदेश भेज सकते है।*

*नारायण ! नारायण !! नारायण !!!*

*- स्वामी रूपेश्वरानन्द🚩*
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